टेक्स्ट-से-वीडियो जेनरेटर
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Flux Dev का मुफ्त संस्करण
तेज और लागत-कुशल
अत्याधुनिक इमेज जेनरेशन
अत्यंत उच्च गुणवत्ता
टेक्स्ट को डायनेमिक वीडियो में बदलें
परंपरागत कार्यप्रवाह में, वीडियो‑ऑडियो सामग्री तैयार करने के लिए पेशेवर स्तर की वीडियो शूटिंग, लोकेशन स्काउटिंग व चयन, कलाकार निर्देशन और एडिटिंग जैसी कई कौशलों की आवश्यकता होती है। लेकिन यदि इन सभी चरणों को पूरी तरह हटा दिया जाए, तो अनुभव कैसा होगा? टेक्स्ट‑टू‑वीडियो जनरेशन तकनीक उपयोगकर्ता द्वारा लिखे गए वर्णनात्मक वाक्यों को समझती है और अपने‑आप उन निर्देशों से मेल खाते दृश्य और शॉट्स तैयार करती है। यह मानो आपके पास एक ऐसी प्रोडक्शन टीम हो, जो आपकी रचनात्मकता की गति से काम करती हो。
बस दृश्य का वर्णन करने वाले कुछ वाक्य लिखें, और आपकी आँखों के सामने वास्तविक‑से लगने वाले गतिशील दृश्य फ़्रेम‑दर‑फ़्रेम प्रकट हो जाएंगे, बिना किसी स्टॉक लाइब्रेरी या तैयार वीडियो पर निर्भर हुए।
साधारण प्राकृतिक भाषा में निर्देश देकर आप फ़िल्म‑जैसा कैमरा मूवमेंट, प्रकाश में परिवर्तन, और दृश्य का माहौल गढ़ने वाले विविध विज़ुअल इफ़ेक्ट्स तक उत्पन्न कर सकते हैं।
यह विशेष रूप से शॉर्ट‑फॉर्म वीडियो कंटेंट बनाने की ज़रूरत वाले उपयोग‑परिदृश्यों के लिए उपयुक्त है; तैयार वीडियो सीधे TikTok, YouTube Shorts, Instagram Reels जैसी प्लेटफ़ॉर्म पर प्रकाशित किए जा सकते हैं।
आप वास्तविक शूट की पूरी प्रक्रिया को छोड़ सकते हैं, और लोकेशन, उपकरणों की उपलब्धता या मौसम जैसी बाहरी सीमाओं से मुक्त रह सकते हैं。
कैसे काम करता है
हमने वीडियो जेनरेशन की प्रक्रिया को 4 सरल और स्पष्ट चरणों में सुसंगठित किया है।
वर्णन लिखें
टेक्स्ट वाक्यों के माध्यम से आप जो दृश्य, माहौल और क्रिया‑कलाप कल्पना कर रहे हैं, उनका वर्णन करें; मुख्य बात यह है कि दृश्यात्मक तत्वों के बारे में जितना हो सके उतना ठोस और स्पष्ट रूप से लिखें।
मॉडल चुनें
कई नवीनतम‑पीढ़ी के मॉडलों में से एक का चयन करें। प्रत्येक मॉडल यथार्थता, शैलीगत अभिव्यक्ति और रेंडरिंग गति के मामले में अलग‑अलग विशेषताएँ रखता है।
AI से जनरेट कराएँ
क्लाउड‑आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर आपकी रिक्वेस्ट को प्रोसेस करता है और भौतिक गतियों व प्रकाश‑प्रभावों में उच्च स्तर पर सुसंगत, स्वाभाविक और स्मूद वीडियो अपने‑आप तैयार करता है।
वीडियो डाउनलोड करें
बिना वॉटरमार्क वाला वीडियो फ़ाइल प्राप्त करें, जो तुरंत उपयोग के लिए तैयार है; आवश्यकता होने पर आप पहले उसे एडिट कर सकते हैं, या सीधे विभिन्न प्लेटफ़ॉर्म पर प्रकाशित कर सकते हैं।
क्यों यह प्लेटफ़ॉर्म अनेक समाधानों में अलग पहचान बनाता है
हर टेक्स्ट‑टू‑वीडियो समाधान एक‑सा नहीं होता। नीचे वे प्रमुख विशेषताएँ हैं, जिनकी आप किसी पेशेवर और उन्नत समाधान से अपेक्षा कर सकते हैं।
उन्नत मोशन ग्राफ़िक्स (Motion Graphics)
यह केवल साधारण ट्रांज़िशन इफ़ेक्ट वाले स्लाइड‑शो नहीं, बल्कि भौतिक नियमों के अनुरूप मूवमेंट ट्रैजेक्टरी को पुनःनिर्मित करने वाली सूक्ष्म फ़्रेम‑दर‑फ़्रेम ऐनिमेशन हैं।
लचीले इनपुट विकल्प
शुद्ध टेक्स्ट, स्ट्रक्चर्ड प्रॉम्प्ट्स के साथ‑साथ रेफ़रेंस लिंक के ज़रिए विज़ुअल स्टाइल को परिभाषित करने की सुविधा, ताकि आप अनेक प्रकार के इनपुट फ़ॉर्मैट का उपयोग कर सकें।
ब्रांड कस्टमाइज़ेशन
आप अपने सभी वीडियो में एकसमान विज़ुअल आइडेंटिटी बनाए रख सकते हैं। रणनीतिक रूप से ब्रांड संचालित करने वाली एजेंसियों और एंटरप्राइज़ के लिए यह एक अनिवार्य घटक है।
हर प्लेटफ़ॉर्म के लिए अनुकूलित वर्शन फ़ॉर्मैट
वर्टिकल (9:16), हॉरिज़ॉन्टल (16:9) और स्क्वायर (1:1) जैसे कई आस्पेक्ट रेशियो में वीडियो आउटपुट की सुविधा, ताकि आप अलग‑अलग सोशल प्लेटफ़ॉर्म के लिए पब्लिशिंग फ़ॉर्मैट को आसानी से ऑप्टिमाइज़ कर सकें।
प्राकृतिक वॉइस जेनरेशन
एडवांस्ड मॉडल स्वाभाविक, इंसानी आवाज़ के क़रीब लगने वाली स्पीच तैयार करते हैं, जिससे पारंपरिक टेक्स्ट‑टू‑स्पीच समाधानों में आमतौर पर पाई जाने वाली मशीन जैसी ध्वनि और नॉइज़ काफ़ी हद तक समाप्त हो जाती है।
बहुभाषी सपोर्ट
बिना मौजूदा वर्कफ़्लो बदले या अतिरिक्त टूल इंटीग्रेशन किए, आप आसानी से एक ही वीडियो के बहुभाषी वर्शन तैयार कर सकते हैं।
हाई‑स्पीड रेंडरिंग
ज़्यादातर वीडियो 3 मिनट के भीतर रेंडर हो जाते हैं, जिससे आप तेज़ी से इटरेट कर सकें और कई क्रिएटिव कॉन्सेप्ट व स्टाइल का वैलिडेशन कर सकें।
सीन‑लेवल एडिटिंग
आपको केवल उन सीन को दोबारा जेनरेट करना होता है जिनमें बदलाव चाहिए, पूरी वीडियो फ़िर से बनाने की ज़रूरत नहीं पड़ती, जिससे फ़ाइन‑ट्यूनिंग और करेक्शन में लगने वाला समय काफ़ी कम हो जाता है।
यूज़र द्वारा वास्तविक रूप से तैयार किए गए वीडियो के उदाहरण
ये सभी वीडियो केवल टेक्स्ट विवरण के आधार पर स्वतः जेनरेट किए गए हैं; किसी भी तरह की लाइव शूट की गई फ़ुटेज या इमेज/वीडियो स्टॉक लाइब्रेरी संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती।
ट्रैवल कंटेंट क्रिएटर्स आम तौर पर ओपनिंग के लिए एरियल शॉट्स शूट करते हैं, जिनके लिए अक्सर महंगे ड्रोन और लोकेशन के लिए एंट्री परमिट की आवश्यकता पड़ती है। इस झरने का ड्रोन शॉट दिखाता है कि केवल एक विवरण‑प्रधान टेक्स्ट प्रॉम्प्ट से ऐसा वीडियो बनाया जा सकता है जो रियल शूट को बदल सके। शाम के गोल्डन ऑवर की गरमाहट भरी रोशनी और इमर्सिव कैमरा मूवमेंट दोनों को प्रोफ़ेशनल ट्रैवल डॉक्यूमेंट्री के मानकों के अनुसार दोबारा रिक्रिएट किया गया है।
इस तरह के "थेरैपी‑स्टाइल (satisfying)" वायरल वीडियो आम तौर पर विशेष मैक्रो शूटिंग उपकरण और बेहद सटीक फिजिकल सेट‑अप की मांग करते हैं। इस उदाहरण में सभी वास्तविक मटीरियल बिहेवियर—जैसे काइनेटिक सैंड का कटना और बिखरना, टेक्स्चर की बारीक समृद्ध डिटेल, और बिखरी हुई रोशनी का लुक—सभी पूरी तरह टेक्स्ट से जेनरेट किए गए हैं। इस तरह का कंटेंट सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर एंगेजमेंट बढ़ाने के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है।
कॉन्सेप्चुअल कॉमेडी वीडियो टेक्स्ट‑टू‑वीडियो तकनीक के लिए विशेष रूप से उपयुक्त हैं, क्योंकि इनमें से कई सिचुएशन को वास्तविक शूट में बनाना लगभग असंभव होता है या फिर उसके लिए बहुत ऊँचे प्रोडक्शन बजट की ज़रूरत पड़ती है। इस अतियथार्थवादी "बिज़नेस डॉग" सीन में कुत्ते के फ़र को बेहद रियलिस्टिक तरह से रेंडर किया गया है और उसे हाई‑क्वॉलिटी शहरी लोकेशन के साथ जोड़ा गया है, जो स्किट‑आधारित कंटेंट या हल्के‑फुल्के, ह्यूमरस मार्केटिंग कैंपेन के लिए बेहद उपयुक्त है।
टेक्स्ट‑टू‑वीडियो तकनीक को समझना
टेक्स्ट‑टू‑वीडियो AI को बड़े पैमाने पर ऐसे वीडियो सीक्वेंस डेटा‑सेट पर प्रशिक्षित किया जाता है जिनमें वर्णनात्मक सबटाइटल के रूप में एनोटेशन होते हैं। मॉडल भाषा पैटर्न और विज़ुअल कॉन्सेप्ट्स के बीच संबंध सीखता है। इसलिए, जब उपयोगकर्ता "समुद्र की सतह पर डूबता सूरज" जैसा टेक्स्ट इनपुट करते हैं, तो सिस्टम पहले देखे गए हज़ारों समान दृश्यों का संदर्भ लेता है और उनसे सीखे पैटर्न के आधार पर एक बिल्कुल नया फ्रेम तैयार करता है।
नई पीढ़ी के मॉडल सिर्फ एसेट लाइब्रेरी से क्लिप्स को काट‑छाँट कर जोड़ते नहीं हैं, बल्कि पूरी तरह नए शॉट्स संयोजित करते हैं और साथ ही समय‑आधारित निरंतरता बनाए रखते हैं (अर्थात, वस्तुएँ टाइमलाइन पर स्वाभाविक रूप से गतिमान रहती हैं)। उन्नत सिस्टम न केवल भौतिक नियम और लाइट बिहेवियर समझते हैं, बल्कि भावनात्मक माहौल भी समझते हैं। उदाहरण के लिए, अगर प्रॉम्प्ट में "उदास" जैसा शब्द आता है, तो यह सूक्ष्म भावना सिर्फ दृश्य के विषय में ही नहीं, बल्कि कलर ग्रेडिंग और कैमरा मूवमेंट में भी परिलक्षित होती है।
यह तकनीक अब उस चरण से बहुत आगे बढ़ चुकी है जब यह सिर्फ स्थिर फ्रेम या अलग‑अलग छोटे शॉट ही बना सकती थी। आज के अनुप्रयोग स्मूद, सतत वीडियो जेनरेट कर सकते हैं, जिनकी इमेज क्वॉलिटी टीवी ब्रॉडकास्ट स्तर के क़रीब होती है और जिनमें उपयुक्त मोशन ब्लर व डेप्थ‑ऑफ़‑फील्ड इफ़ेक्ट शामिल होते हैं। और उच्च‑स्तरीय पेड़ मॉडल में तो यह ऑडियो के साथ सिंक भी हो सकता है। जिस क्वॉलिटी के लिए पहले अलग प्रोडक्शन बजट की ज़रूरत होती थी, वह अब सिर्फ ब्राउज़र के भीतर हासिल की जा सकती है।
तकनीकी सिद्धांत को सरल रूप में समझें
- प्राकृतिक भाषा संसाधन (NLP)इनपुट टेक्स्ट को अर्थपूर्ण घटकों में विश्लेषित करना, और विषय, क्रिया, दृश्य‑परिवेश व स्टाइल से जुड़ी निर्देशों की पहचान करना।
- दृश्य संरचनाAI मॉडल टेक्स्ट विवरण के आधार पर 3D स्पेस की समझ बनाता है और फिर उपयुक्त गहराई और स्केल के साथ प्रत्येक एलिमेंट को प्लेस करता है।
- समय के साथ रेंडरिंगसमय क्रम के अनुसार हर फ़्रेम जेनरेट करना, और मोशन वेक्टर की मदद से विज़ुअल को मज़बूत करना, ताकि ट्रांज़िशन अधिक स्मूद हों और ऑब्जेक्ट की मूवमेंट ज़्यादा रियलिस्टिक लगे।
प्रॉम्प्ट लिखने की प्रभावी विधियाँ
- सबसे पहले, सीन निर्धारित करें: जैसे “एक छोड़े जा चुके मेट्रो प्लेटफ़ॉर्म पर, पौधे बेधड़क उग आए हैं, ढलते सूरज की तिरछी रोशनी टूटी हुई छत से छनकर आ रही है” जैसी वर्णनाएँ, AI मॉडल को स्थानिक संदर्भ समझने में मदद करती हैं।
- कैमरा मूवमेंट को स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट करें: जैसे “धीमी डॉली मूव के साथ कैमरा को मुख्य विषय के क़रीब लाना” या “शोल्डर‑माउंट हैंडहेल्ड शूटिंग वाली डॉक्यूमेंटरी शैली अपनाना” जैसी निर्देश पंक्तियाँ, अंतिम फ़्रेम की समग्र विज़ुअल फील पर गहरा प्रभाव डालती हैं।
- रिदम और माहौल पर नियंत्रण रखें: “तनावपूर्ण”, “ड्रीमी” या “मृदु और सधे हुए” जैसे शब्द, एडिटिंग की रफ़्तार और विज़ुअल डिज़ाइन को प्रभावित करते हैं, और केवल सीन एलिमेंट्स का वर्णन करने से आगे बढ़कर डायरेक्टोरियल इफ़ेक्ट क्रिएट करते हैं।
कंटेंट के पुनः उपयोग की रणनीतियाँ
इस तकनीक से सबसे ज़्यादा लाभ कौन उठा सकता है?
मार्केटिंग टीम
प्रोडक्शन के औपचारिक चरण में जाने से पहले आप अलग‑अलग विज्ञापन क्रिएटिव कॉन्सेप्ट्स को जल्दी से वेलिडेट कर सकते हैं। A/B टेस्टिंग के लिए आप एक ही बार में दर्जनों अलग‑अलग वर्ज़न के क्रिएटिव एसेट्स जेनरेट कर सकते हैं।
- सोशल मीडिया विज्ञापन
- प्रोडक्ट लॉन्च
- ब्रांड स्टोरीटेलिंग कैंपेन
शिक्षा क्षेत्र के पेशेवर
जटिल कॉन्सेप्ट भी अगर विज़ुअल रूप में दिखाए जाएँ तो कहीं ज़्यादा आसानी से समझ में आते हैं। सिर्फ़ टेक्स्ट कंटेंट की तुलना में वीडियो सीखने की सामग्री की याददाश्त और समझ दोनों को काफ़ी बढ़ा देता है।
- कोर्स टीज़र व प्रमोशनल शॉर्ट्स
- अमूर्त कॉन्सेप्ट्स की विज़ुअलाइज़ेशन
- ऐतिहासिक घटनाओं के रीइनेक्टमेंट वीडियो
स्टार्टअप टीम
महँगी वीडियो प्रोडक्शन में निवेश किए बिना ही आप अपने प्रोडक्ट को स्पष्ट, आसानी से समझ आने वाले और विज़ुअली आकर्षक तरीके से दिखा सकते हैं। निवेशकों को पिच करते समय हो या लैंडिंग पेज पर प्रोडक्ट की वैल्यू प्रपोज़िशन समझाते समय—ऐसी वीडियो हमेशा एक अहम घटक रहती हैं।
- नई फ़ीचर रिलीज़ एक्सप्लेनेशन
- यूज़र ऑनबोर्डिंग अनुभव
- प्रोडक्ट अपडेट की मुख्य बातें (सारांश)
कंटेंट क्रिएटर
अपनी ऊर्जा को ज़्यादा खर्च किए बिना भी आप कंटेंट पब्लिश करने की एक स्थिर रफ़्तार बनाए रख सकते हैं। बस एक स्क्रिप्ट से शुरू करके आप आसानी से अलग‑अलग फ़ॉर्मेट और स्टाइल में कई वीडियो बना सकते हैं।
- YouTube Shorts शॉर्ट वीडियो
- स्टोरी‑ड्रिवन कंटेंट
- म्यूज़िक विज़ुअलाइज़ेशन कंटेंट
इंटीग्रेटेड प्लेटफ़ॉर्म ही क्यों चुनें
कई तरह के AI मॉडल एक ही इंटरफ़ेस में सीधे इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जिससे बिखरे और टूटी‑फूटी वर्कफ़्लो से पूरी तरह छुटकारा मिलता है।
कई मॉडल, वन‑स्टॉप इंटेग्रेशन
हमने Google Veo, OpenAI Sora, Kling, Wan, 海螺, Pika, Runway सहित कई मॉडल एक ही प्लेटफ़ॉर्म में इंटीग्रेट किए हैं। हर मॉडल की अपनी‑अपनी खूबियाँ हैं—जैसे फ़िल्म‑स्तरीय रियलिस्टिक विज़ुअल्स, आर्टिस्टिक स्टाइल, तरह‑तरह के इफ़ेक्ट्स और हाई‑स्पीड रेंडरिंग आदि। आपको अलग‑अलग सब्सक्रिप्शन मैनेज करने या कई इंटरफ़ेस सीखने की ज़रूरत नहीं; एक ही वर्कस्पेस में रहकर आप सभी मॉडलों के आउटपुट को साथ‑साथ तुलना कर सकते हैं।
सूक्ष्म नियंत्रण विकल्प
यह अधिकतम 1080p रिज़ॉल्यूशन, ड्यूरेशन कंट्रोल, आस्पेक्ट‑रेशियो चयन और बैच जेनरेशन जैसी क्षमताओं को सपोर्ट करता है। प्रोफ़ेशनल प्रोजेक्ट्स को आम तौर पर काफ़ी लचीलापन चाहिए होता है; हमारी पैरामीटर‑आधारित सेटिंग्स आपको जेनरेशन के हर डिटेल पर बारीक नियंत्रण देती हैं, वह भी बिना अनावश्यक ऑपरेशनल जटिलता बढ़ाए।
पूरी तरह स्पष्ट व्यावसायिक लाइसेंसिंग
सभी जेनरेट किए गए वीडियो 100% आपके स्वामित्व में रहते हैं और आप उन्हें किसी भी व्यावसायिक परिदृश्य में स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल कर सकते हैं। पेड प्लान से निकले वीडियो पर कोई वॉटरमार्क नहीं होता और न ही किसी तरह की छिपी हुई उपयोग‑सीमाएँ होती हैं। जिन एजेंसियों, फ़्रीलांसरों और एंटरप्राइज़ों को साफ़‑सुथरे बौद्धिक संपदा प्रावधानों की ज़रूरत होती है, उनके लिए यह सबसे बुनियादी और सबसे अहम सुरक्षा है।
एंटरप्राइज़‑ग्रेड सुरक्षा
आपके प्रॉम्प्ट्स और जेनरेट किया गया कंटेंट पूरी तरह गोपनीय जानकारी की तरह ट्रीट किया जाता है। हम ग्राहक‑डेटा का उपयोग मॉडल ट्रेन करने के लिए नहीं करते, और GDPR, CCPA जैसी प्राइवेसी रेगुलेशन का पालन करते हैं, ताकि आपके सभी क्रिएटिव प्रोजेक्ट हमेशा एक सुरक्षित वातावरण में पूरी तरह संरक्षित रहें।
Text-to-Video के बारे में लोग क्या कह रहे हैं
जानें कि क्रिएटर्स X पर text-to-video AI के बारे में क्या चर्चा कर रहे हैं। वास्तविक उदाहरणों से प्रेरणा लें और AI वीडियो जनरेशन में नवीनतम रुझान देखें।
In a hyperrealistic 8K ASMR video, a hand uses a knitted knife to slowly slice a burger made entirely of knitted wool. The satisfyingly crisp cut reveals a detailed cross-section of knitted meat, lettuce, and tomato slices. Captured in a close-up with a shallow depth of field,…
— 1LittleCoder💻 (@1littlecoder) December 16, 2025
Wow when did Grok Imagine text-to-video get so good? 🤯
— Min Choi (@minchoi) December 22, 2025
Try this prompt in comment pic.twitter.com/OmJO5Aj7KY
What if?
— Heather Cooper (@HBCoop_) December 8, 2025
Prompt: A miniature civilization living in the pages of an ancient scroll, building tiny castles, pyramids, and cities from letters and paragraphs as the pages unroll
Veo 3.1 text to video: pic.twitter.com/fBxUO5w7xE
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
व्यावहारिक उपयोग में, टेक्स्ट से वीडियो बनाने की प्रक्रिया कैसे काम करती है?
आप सबसे पहले टेक्स्ट में उस वीडियो का विवरण लिखते हैं जिसे आप बनाना चाहते हैं, और सीन की कंपोज़िशन, कैमरा एंगल, विज़ुअल स्टाइल, ऐक्शन आदि जैसे विस्तृत तत्व निर्धारित करते हैं। AI मॉडल इस टेक्स्ट का विश्लेषण करके कंटेंट के अनुसार उपयुक्त विज़ुअल प्रेज़ेंटेशन डिज़ाइन करता है और ऐनिमेशन व लाइटिंग इफ़ेक्ट्स में उच्च स्तर की एकरूपता वाला वीडियो फ़ाइल जनरेट करता है, जिसके लिए पारंपरिक शूटिंग या मैन्युअल एडिटिंग वर्कफ़्लो की बिल्कुल ज़रूरत नहीं पड़ती।
जिसे हम “टेक्स्ट‑टू‑वीडियो” AI मॉडल कहते हैं, वह वास्तव में क्या होता है?
यह एक न्यूरल‑नेटवर्क आधारित मॉडल होता है, जो विशाल मात्रा में वीडियो‑और‑टेक्स्ट पेयर्ड डेटा पर ट्रेन होकर भाषा और विज़ुअल कंटेंट के बीच की मैपिंग रिलेशनशिप सीखता है। जब आप टेक्स्ट इनपुट करते हैं, तो यह विवरण के अनुरूप डायनेमिक फ़्रेम जनरेट करता है और अपने‑आप कैमरा मूवमेंट, कैरेक्टर और ऑब्जेक्ट की मूवमेंट, एनवायरनमेंट इफ़ेक्ट्स, लाइटिंग तथा अन्य विज़ुअल एलिमेंट्स को कंट्रोल करता है।
क्या मैं एक ही स्क्रिप्ट से कई सीन वाला वीडियो बना सकता/सकती हूँ?
हाँ। आप अपने इनपुट टेक्स्ट को सीन के अनुसार सेक्शनों में बाँटकर एक सम्पूर्ण स्क्रिप्ट के रूप में व्यवस्थित कर सकते हैं। सिस्टम हर सीन को स्वतंत्र रूप से प्रोसेस करेगा; बाद में आप इन्हें जोड़कर एक एडिटेड सिंगल वीडियो बना सकते हैं, या अलग‑अलग क्लिप के रूप में एक्सपोर्ट कर सकते हैं। यह तरीका विशेष रूप से नैरेटिव कंटिन्यूटी वाली सामग्री के लिए उपयुक्त है, जैसे अध्यायों या अनुच्छेदों के हिसाब से बनाए गए एक्सप्लेनर वीडियो।
औसतन एक वीडियो जनरेट होने में कितना समय लगता है?
ज़्यादातर शॉर्ट वीडियो (लगभग 5 से 15 सेकंड) के लिए रेंडर समय आमतौर पर 1 से 3 मिनट के बीच होता है; वास्तविक समय आपके चुने हुए रिज़ॉल्यूशन और मॉडल के प्रकार पर निर्भर करेगा। अधिक लंबे क्लिप या उच्च चित्र‑गुणवत्ता वाली सेटिंग के लिए अधिक कम्प्यूटेशन समय लग सकता है, लेकिन पारंपरिक शूटिंग और पोस्ट‑प्रोडक्शन पर निर्भर वीडियो प्रोडक्शन की तुलना में यह प्रक्रिया अभी भी कहीं अधिक कम समय में पूरी हो जाती है।
क्या इस टूल को इस्तेमाल करने के लिए वीडियो एडिटिंग आना ज़रूरी है?
नहीं। इस तकनीक के प्रमुख लक्ष्यों में से एक तकनीकी बाधा को कम करना है। यदि आप टेक्स्ट के ज़रिये अपना मनचाहा कंटेंट साफ‑साफ वर्णित कर सकते हैं, तो अधिकतर क्रिएशन वर्कफ़्लो सिस्टम अपने‑आप पूरा कर देता है। एडिटिंग सॉफ़्टवेयर में मैन्युअल रूप से टाइमलाइन खींचने या पैरामीटर समायोजित करने के बजाय, आपको बस टेक्स्ट प्रॉम्प्ट को लगातार बेहतर और अधिक विशिष्ट बनाते रहना होता है, ताकि जनरेट होने वाले परिणामों की क्वालिटी चरण‑दर‑चरण बढ़ती जाए।
क्या मैं क्रेडिट खरीदने से पहले इस प्लेटफ़ॉर्म को आज़मा सकता/सकती हूँ?
हाँ। नए रजिस्टर्ड उपयोगकर्ताओं को अकाउंट बनाते समय कुछ निःशुल्क क्रेडिट दिए जाते हैं। आप इन क्रेडिट्स का उपयोग विभिन्न मॉडल टेस्ट करने, प्रॉम्प्ट लिखने की अलग‑अलग शैली और वैरिएशन आज़माने के लिए कर सकते हैं, और सिस्टम के व्यवहार व आउटपुट क्वालिटी को अच्छी तरह समझ लेने के बाद तय कर सकते हैं कि पेड प्लान में अपग्रेड करना है या नहीं।
क्या जनरेट किए गए वीडियो के साथ व्यावसायिक उपयोग की अनुमति भी शामिल होती है?
सभी पेड प्लान में जनरेट किए गए वीडियो पूर्ण व्यावसायिक उपयोग‑अधिकार के साथ आते हैं। आपको अलग से लाइसेंस फ़ीस चुकाने या स्रोत‑उल्लेख (एट्रिब्यूशन) देने की ज़रूरत नहीं होती; आप इन वीडियो को विज्ञापन कैंपेन, क्लाइंट प्रपोज़ल, पेड प्रोडक्ट और अन्य सभी प्रकार के व्यावसायिक परिदृश्यों में स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल कर सकते हैं।
क्या जनरेट किए गए वीडियो पर वॉटरमार्क (ट्रांसपेरेंट लोगो) होगा?
फ़्री प्लान में जनरेट किए गए वीडियो पर एक छोटा वॉटरमार्क शामिल होगा; पेड प्लान में वॉटरमार्क पूरी तरह हटा दिया जाता है और आपको साफ‑सुथरी, प्रोफ़ेशनल वीडियो फ़ाइल मिलती है, जिसे आप कभी भी सीधे बाहरी रूप से पब्लिश कर सकते हैं।
अभी अपने टेक्स्ट को फ़िल्म‑स्तरीय क्वालिटी वाले प्रोफ़ेशनल वीडियो में बदलें
अब अपनी सोच और आइडिया को टालते रहने की कोई वजह नहीं बची